Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

अनुरागी नायक लोभी होते हुए भी अवसर आने पर त्याग कर सकता है, किंतु स्वभाव से त्यागी नायक को अत्यंत प्रयास करने पर भी, रागी (आसक्त) नहीं बनाया जा सकता।