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महात्मा गांधी के उद्धरण

अनर्थकारी वस्तुओं की उचित व्यवस्था के लिए तो हम शायद ही शारीरिक परिश्रम करते हैं। इससे अनेक प्राणियों को तंगी और बेजा तकलीफ़ भुगतनी पड़ती है। मतलब हम अस्तेय और अपरिग्रह-व्रत को पल-पलपर भंग करते हैं।