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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

अकेले रहने पर ही मैं अधिक अच्छी तरह से कार्य कर सकता हूँ, और जब मैं संपूर्णतः निःसहाय रहता हूँ, तभी मेरी देह एवं मन सबसे अधिक अच्छे रहते हैं।