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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

अगर हनुमान-सरीखा सीना फाड़कर बताऊँ, तो कलेजे में सैकड़ों घाव मिलेंगे—रहस्यवादी गीतों के गोल-गोल छेद, छायावादी कविता की हल्की खरोंचें, प्रगतिवादी काव्य के घन के निशान और प्रयोगवादी कविताओं के ऐंचक-बेंचक डिज़ाइनदार सूराख।