Font by Mehr Nastaliq Web

हरिशंकर परसाई के उद्धरण

आम कवि-सम्मेलनों में या तो गाना जमता है या गाली, क्योंकि ये दोनों सहज ही समझ में आते हैं। इन दोनों के परे जो कविता नाम की चीज़ है, वह अगर सुनाई जाए तो कवि को 'हूट' कर दिया जाएगा।