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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

आज की भौतिक उपलब्धि यदि मनुष्य को सुख नहीं दे पा रही है, तो सोचना और सन्धान करना जरूरी है कि कहीं हमारा कर्मकाँड प्रदूषित तो नहीं हो रहा है या कि हम सजातीय धरातल से च्युत तो नहीं हो गए हैं?