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महादेवी वर्मा के उद्धरण

आज का यथार्थवाद, बुद्धि और साम्यवाद का ऐसा पुत्र है जिसके आविर्भाव के साथ ही, आलोचक जन्मकुंडली बना-बना कर उसके चक्रवर्तित्व की घोषणा में व्यस्त हो गए। स्वयं उनके जीवन और विकास के लिए कैसे वायुमंडल, कैसी धूपछाया और कितने नीर-क्षीर की आवश्यकता होगी इसकी उन्हें चिंता नहीं।