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रामसहाय दास

बनारस, उत्तर प्रदेश

'राम सतसई' के रचयिता। शृंगार की सरस उद्भावना और वाक् चातुर्य के कवि।

'राम सतसई' के रचयिता। शृंगार की सरस उद्भावना और वाक् चातुर्य के कवि।

रामसहाय दास की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 40

ऐसे बड़े बिहार सों, भागनि बचि-बचि जाय।

सोभा ही के भार सों, बलि कटि लचि-लचि जाय॥

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सरकी सारी सीस तें, सुनतहिं आगम नाह।

तरकी वलया कंचुकी, दरकी फरकी वाह॥

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झलकनि अधरनि अरुन मैं, दसननि की यौं होति।

हरि सुरंग घन बीच ज्यौं, दमकति दामिनि जोति॥

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लाल चलत लखि वाल के, भरि आए दृग लोल।

आनन तें बात कढ़ी, पीरी चढ़ी कपोल॥

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लोललोचनी कंठ लखि, संख समुद के सोत।

अरु उड़ि कानन कों गए, केकी गोल कपोत॥

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI