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मृदुला गर्ग

1938 | कोलकाता, पश्चिम बंगाल

समादृत कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

समादृत कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

मृदुला गर्ग की संपूर्ण रचनाएँ

कविता 1

 

संस्मरण 1

 

उद्धरण 51

दिन का अंधकार ख़तरनाक होता है। रात का अँधेरा नींद लाता है, दिन का अँधेरा ख़्वाब।

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आधुनिक भारतीय साहित्य में प्रेम की अनूठी रचना कोई है तो रवींद्रनाथ ठाकुर की 'शेशेर कबिता'।

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अच्छा काम है लघु उद्योग चलाना। सामाजिक अपराध-बोध से आदमी बचा रहता है। लघु शब्द बड़ा करामाती है। बड़े उद्योग चलाओगे तो शोषक कहलाओगे, लघु उद्योग चलाओगे तो देश सेवक।

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जो ऊपरी सतह पर स्पष्ट दिख रहा हो, उससे असंतुष्ट होने पर ही, वैकल्पिक संसार की रचना करने के ख़याल से कोई कलम उठाता है।

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माशूक़ वह बला है, जिसमें कोई ख़ामी नज़र नहीं आती, जिससे प्यार के बदले प्यार नहीं माँगा जाता, जो हाड़-माँस का होकर भी अशरीरी होता है, जिसकी हर ख़ता माफ़ होती है, हर ज़ुल्म पोशीदा।

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पुस्तकें 2

 

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