महुवा फूल झरने के बाद
औचक नज़र मिली और धक्क हुआ दिल... स्थिर हो गई शिवा... एक चेहरा जो उसके बगलगीर होकर गुजरा, उसे स्वीकार करने में पल दो पल लगे—हाँ...है तो वही...साँवले पिचके चेहरे पर भराव आ गया है। मोटे गाल लावण्यीय होकर दमकने लगे हैं। वह ठिठकने लगी थी, पर जाने क्या सोचकर