मेड़ता के रचनाकार

कुल: 3

मीरा

1498 - 1546

भक्तिकाव्य में कृष्ण भक्ति शाखा का चर्चित नाम। राज परिवार में जन्म लेकर भी रजवाड़ों में किए जा रहे स्त्री-शोषण के विरुद्ध खड़ी कवयित्री।

भक्तिकाल के निर्गुण संतकवि। वाणियों में प्रेम, विरह, और ब्रह्म की साधना के गहरे अनुभव। जनश्रुतियों में संत दादू के अवतार।

अपने युग के आत्मज्ञानी जैन संत और श्मशानों में तपे सिद्धयोगी। पदों में कबीर का तीखा अंदाज और मीरा की मिठास दोनों एक साथ समाहित।

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