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यह जो समय

ye jo samay

उद्भ्रांत

उद्भ्रांत

यह जो समय

उद्भ्रांत

और अधिकउद्भ्रांत

    ऋण, रोग अथवा

    अवसादग्रस्त जीवन का

    तीसरा आयाम था संघर्ष

    युद्ध करते हुए इनसे।

    अथवा अव्यवस्था से

    अथवा चालाक, क्रूर, निर्मम

    व्यवस्था से

    जननी जो थी

    अनीतियों की,

    अन्याय,

    अव्यवस्था की;

    सतत युद्ध करते हुए और

    क्रुद्ध लहरों की तरह

    बारंबार

    टकराते हुए पहाड़ से

    क्या ला सका बदलाव मैं?

    यहाँ से वहाँ तक फैले

    विराट अंधकार में

    क्या जीवन का फ़ास्फ़ोरस

    दियासलाई की तीली की तरह

    थोड़ी देर के लिए

    बिखेर सका रोशनी?

    इसका निर्णय तो

    करेगा

    यात्री ही

    यह जो समय।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अस्ति (पृष्ठ 45)
    • रचनाकार : उद्भ्रांत
    • प्रकाशन : नेशनल पब्लिशिंग हाउस
    • संस्करण : 2011

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