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वह हर अनुरोध को बदल देते हैं विरोध में

wo har anurodh ko badal dete hain virodh mein

पूजा कुमारी

पूजा कुमारी

वह हर अनुरोध को बदल देते हैं विरोध में

पूजा कुमारी

और अधिकपूजा कुमारी

    वह ख़ुश होते हैं

    जब बजती हैं तालियाँ

    वह ख़ूब-ख़ूब बोलते हैं

    सुनते कुछ भी नहीं

    उनका यक़ीन बहुत गहरा है कि हमारा एक आदि देवता

    करता है ख़ूब सारा नशा

    वह एक ऐसी प्रजा चाहते हैं जो नशे में हो

    सुध-बुध गवांकर करती रहे यकीन

    कि लोक कथाओं में बैठा एक नायक बजाता था बाँसुरी

    और जानता था भेड़ बकरियों की भाषा

    या इंसान के सिर पर हाथी का सिर लगा देने से

    वह बन जाता है देवता

    और वह करने लगता है हर अशुभ से देश की रक्षा

    बाद इसके कि सैकड़ों पीढ़ियों से देश में है जाति

    जाति के दंड और लाभ

    हर शुभ लाभ के साए में बैठा वह शुभंकर

    नहीं बदल पाया मनुष्यों और मनुष्यों में भेद

    लटकी हुई जीभ के साथ प्रचंड रौद्र की देवी है

    हर घर में फिर भी देश रहा ग़ुलाम

    और अब है हर घर मोदी

    जो बहुत कुशल हैं इस बात पर

    एक पनपते हुए लोकतंत्र को कैसे विस्थापित कर दिया

    जाय मनुस्मृति से

    अनुरोध को जनता की आज्ञा मान लेने वाली महान परंपरा को मुँह चिढ़ाते हुए

    वह हर अनुरोध को बदल देते हैं विरोध में

    शासन के नियमों को बदल देते हैं

    धर्म के नियमों से

    एक नया आया हुआ विचार उन्हें लगता है बहुत ख़तरनाक

    इतने महान देश की मिथकीय स्मृति के भीतर

    यह विचार है एकदम अछूत

    वह तर्क से परास्त होने लगते हैं जब

    तब ढूँढ़ते हैं मिथकों के नशे में चूर जनता

    और फिर वह ख़ूब बोलते हैं

    और हर अनुरोध को बदल देते हैं

    देश के विरोध में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूजा कुमारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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