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जब अपने पर भरोसा खो बैठते हैं हम

जब सब अविश्वसनीय होने लगता है

जब हम निहायत अकेला महसूस करने लगते हैं

तब उपजता है वहम

भ्रम की शक्ल में

यह यूँ ही नहीं आता

बताकर तो क़तई नहीं

लेकिन जब इसे आना होता है

यह दरवाज़ा तक नहीं खटखटाता

यह दबे पाँव आता है

और एक बार जाता है तो जड़ जमा कर बैठ जाता है

फिर दीमक बनकर चाटने लगता है धीमे-धीमे हमारे वजूद को

यह आता है अपशकुन की सूरत बनकर

यह आता है आस्था की मूरत बनकर

यह आता है देवी-देवता और भूत-पिशाच का बाना ओढ़कर

यह आता है अविश्वास का विश्वास बनकर

हमेशा अजीबोग़रीब होते हैं वहम

हालाँकि जब आप इसके शिकार बने हों

तब सब उल्टा लगता है

अपने को छोड़कर

दुनिया के सारे लोग वहम के शिकार लगते हैं

मसलन

वहम के शिकार को

कभी-कभी लगता है

कि लोग हाथ धोकर पीछे पड़ गए हैं उसके पीछे

जब कि सच तो यह है :

आज के ज़माने में

किसी के पास इतना वक़्त भी नहीं

कि वह ख़ुद अपना ही पीछा कर सके

सन्नाटे में प्रेत का भ्रम रचता है वहम

वह प्रेत जिसके पाँव हमेशा पीछे होते हैं

वहम जब हमारे पास कुंडली मारकर बैठा हो

तब एक पत्ती तक की आवाज़ तक हमें कायर बना देती है

और हम उन देवताओं को सुमिरने लगते हैं

जो हमारी कल्पनाओं के अलावा कहीं नहीं होते इस दुनिया में

कभी-कभी हम अपना भरोसा ख़ुद इस तरह खो देते हैं

कि हर काम के पहले इष्ट को याद करना ज़रूरी हो जाता है

कि हम नजूमियों के चक्कर दर चक्कर काटने लगते हैं

कि हर असफलता के लिए ख़ुद की क़िस्मत को दोषी ठहराने लगते हैं

मित्रो, हो सके तो कभी-कभार हम यह भी वहम पाल लें

कि हम ख़ुद कर सकते हैं कोई भी कठिन लगने वाला काम

और जब कभी हमें असफलताएँ हाथ लगें

तो निराश होने के बजाय

फिर समूचे आत्मविश्वास से जुट जाएँ

विपत्तियाँ सभी के पास आती हैं

दुख सभी के खाते में बहुतायत होते हैं

तो इसके लिए वहम पालने की बजाय क्यों हम

उठ खड़े हों उन पाखंडों के ख़िलाफ़

जिन्होंने हमारा जीना अभी तक दुश्वार कर रखा है

आइए कुछ समय के लिए हम यह वहम पाल लें

कि कुछ भी अलौकिक नहीं इस दुनिया में

सब कुछ इस मनुष्य का ही रचा-गढ़ा हुआ

तो क्यों कुछ देर के लिए हम

कल्पित देवी-वताओं की बजाय ख़ुद पर पक्का यक़ीन करें

और आगे बढ़ने की गाढ़ी क़वायद करें

कोई बैसाखी थामने की बजाय

एक बार

हाँ, बस एक बार यक़ीन करें हम ख़ुद पर ईमानदारी से

एक बार वहम मिट जाए हमारे मन-मस्तिष्क से

तो कोई भी रोक नहीं सकता हमें आगे बढ़ने से

तो कोई भी तानाशाह मनमानी नहीं कर सकता इस दुनिया में

स्रोत :
  • रचनाकार : संतोष कुमार चतुर्वेदी
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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