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विवाह

vivah

एलिस ऑसवाल्ड

और अधिकएलिस ऑसवाल्ड

    समय-समय पर हमारा प्रेम किसी नौके की पाल जैसा होता है

    और जब वह पाल बदलने लगता है

    एक दिशा से दूसरी दिशा में

    तो वह अबाबील की पूँछ जैसा होता है

    और जब अबाबील उड़ती है तो वह एक कोट जैसी होती है

    और यदि वह कोट तुम्हारा है तो उसमें एक बड़ी फटन होती है

    और यह फटन एक चौड़े मुँह जैसी होती है

    और जब वह मुँह हवा खींचने लगता है तो वह एक तुरही

    बजाने वाले जैसा होता है

    और जब एक तुरही बजती है तो वह लाखों तुरही की तरह गूँजती है…

    और यही बात मेरी प्रिये, जब लाखों आते हैं और जाते हैं

    हमारी आवश्यकता से कहीं अधिक

    तो यह एक करतब जैसा होता है

    और जब यह करतब शुरू होता है तो वह रस्सी पर दबे पाँव चलते

    पैर के अँगूठे जैसा होता है—

    जो होता है क़िस्मत जैसा

    और जब क़िस्मत शुरू होती है तो वह एक विवाह जैसी होती है

    और यह विवाह होता है प्रेम जैसा—

    और प्रेम ही है सबकुछ।

    स्रोत :
    • रचनाकार : एलिस ऑसवाल्ड
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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