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विध्वंसक कैनवास पर भासैत भविष्य

vidhvansak kainvas par bhasait bhavishya

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

विध्वंसक कैनवास पर भासैत भविष्य

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    जखन कि सभ निसभेर छल

    कोन डर?

    बान्हि देल गेल छथि बूढ़ी गंडक

    पछिला दू सप्ताह सँ

    इन्द्र भगवान तमसायल छथि

    धरतीक माथ पर

    मेघक करिया छत्ता खुजि गेल छै

    देखिते-देखिते

    उनटि जाइत अछि बान्ह

    ढहि जाइत अछि कतेको विश्वास

    मानू शांत हिरोशिमा मे

    खसा देल गेलै परमाणु बम

    आब विकास पुरुषक माथ पर

    तांडव करय लागल विनाश

    चारू दिस पानि

    भासैत लहास

    आगाँ मे राखल अछि

    अंतहीन विध्वंसक कैनवास

    सभ ठाम हलदिल्ली पैसल छैक

    कोनो खबरि नहि

    फुलचनमा डोम मनरी चमाइनक

    मोतिया कुकूर

    अवतार कक्काक बड़द

    माँझो बाबाक महींस

    ककरो कोनो थाह नहि

    एहि विभिषिका मे

    डेराओन सन भंगिमा बना

    क्रूर अट्टहास क' रहलैए प्रकृति

    सभक सौभाग्य धधकि रहल अछि

    एहन विषम समय मे

    धार पर भसियाइत

    पुआरक टाल पर

    बिहुँसैत अछि दू वर्षक नेना

    ओकर मुस्की मे समाओल

    दुखक पराकाष्ठा केँ

    अकानल जा सकैत अछि

    जवाब माँग' चाहैत अछि

    ताल ठोकनिहार विकास-पुरुष सँ

    की अहाँ द' सकब हमरा माय-बाप?

    की जोखि सकब विनाश केँ विकास सँ?

    की पुनः जिया देबै ओहि गाम केँ

    जे अपन समवेत अस्तित्वक संग

    राता-राती अलोपि गेलै

    एहि धरतीक मानचित्र सँ

    अछि जवाब?

    हमरा जवाब चाही

    हम भासि रहल छी

    हमर भविष्य भासि रहल अछि।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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