वे मिलती हैं किसी ईश्वर के कीर्तन में
ve milti hain kisi iishvar ke kirtan mein
पूनम शुक्ला
Poonam Shukla
वे मिलती हैं किसी ईश्वर के कीर्तन में
ve milti hain kisi iishvar ke kirtan mein
Poonam Shukla
पूनम शुक्ला
और अधिकपूनम शुक्ला
कुछ अधेड़ स्त्रियों का एक समूह है यह
खोजता है जीने के बहाने
इनमें कइयों के चेहरे पड़ चुके हैं निस्तेज
आँखों के नीचे काले घेरे
आँखों में और भी निरीहता भर देते हैं
चेहरे की काली झाइयाँ
मेकअप के बाद भी छुप नहीं पातीं
बाल काले हैं पर दरअसल वे काले नहीं हैं
बालों की शुष्कता उनकी उम्र और उनकी उदासी की कहानी
बयान कर देती है ख़ुद ही
आधे झड़ चुके बालों की तरह ही
इनके अरमान भी टूटकर बिखर चुके हैं ज़मीन पर
कुछ कमज़ोर हो चुके शरीर
सूखे हुए झरने से लगते हैं
जिनमें चपलता की कुछ बूँदें
कहीं-कहीं अटकी प्रतीत होती हैं
आख़िर कहाँ मिलें वे आपस में
कहाँ खिल-खिलाकर हँसें
कि इस अधेड़ उम्र में
किसी की उँगली न उठ सके उनपर
चरित्रहीन होने से बच जाएँ वे
तो अब वे मिलती हैं किसी ईश्वर के कीर्तन में
देवी देवताओं के गीत गातीं हुईं
ठठाकर हँसती हैं
छेड़ती हुई एक-दूसरे को
कभी आँखें तो कभी कमर मटकाती हुईं
चटपटी बातों के साथ
इशारे ही इशारे में कुछ गोपनीय बातें करती हुईं
कर लेतीं हैं पूजन, आरती, भोग
और इस तरह वे मरती नहीं
जीवन को कृष्ण बना
बाँध देती हैं रस्सी से
फिर उसके चारों ओर गोलाई में
ताली बजाती हुईं
जीने का रस लेती हैं।
- रचनाकार : पूनम शुक्ला
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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