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तुम्हारे साथ कोक पीना

tumhare saath kok pina

अनुवाद : शायक आलोक

फ़्रैंक ओ’हारा

फ़्रैंक ओ’हारा

तुम्हारे साथ कोक पीना

फ़्रैंक ओ’हारा

और अधिकफ़्रैंक ओ’हारा

    यह सान सेबास्त्यान, ईरून, आँदाय, ब्यारित्स, बायोन की यात्रा से भी अधिक आनंददायक है

    या बार्सिलोना की त्रवेस्सेरा ग्रासिया पर मितली से ग्रस्त हो जाने से भी

    कुछ इसलिए कि अपनी नारंगी कमीज़ में तुम सेंट सेबेस्टियन से भी अधिक सुंदर और प्रसन्न प्रतीत होती हो

    कुछ तुम्हारे प्रति मेरे प्रेम के कारण, कुछ दही के प्रति तुम्हारे अनुराग के कारण

    कुछ इसलिए कि बर्च वृक्षों के चारों ओर दीप्तिमान नारंगी ट्यूलिप खिले हैं

    कुछ इसलिए कि लोगों और मूर्तियों के सम्मुख हमारी मुस्कान एक गूढ़ रहस्य का रूप धारण कर लेती है

    जब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ, तब यह मानना कठिन हो जाता है कि कुछ भी इतना निश्चल हो सकता है

    इतना गंभीर, इतना अप्रिय रूप से अंतिम, जितना कि कोई मूर्ति—जबकि ठीक उसके सामने

    न्यूयॉर्क की चार बजे की उष्ण प्रकाश-छाया में हम एक-दूसरे की ओर डोलते रहते हैं

    मानो कोई वृक्ष अपने चश्मे के भीतर से श्वास ले रहा हो

    और छवि-प्रदर्शनी जैसे चेहरों से ख़ाली हों—सिर्फ़ रंग ही रंग

    तुम सहसा सोचने लगती हो कि लोगों ने आख़िर इन्हें बनाया ही क्यों

    मैं देखता हूँ तुम्हें

    और मैं दुनिया के सभी छवि-चित्रों के बजाए तुम्हें देखना पसंद करूँगा

    शायद बस ‘पोलिश राइडर’ को छोड़कर और वैसे भी वह फ्रिक संग्रहालय में है

    और शुक्र है कि तुम अभी तक वहाँ नहीं गई हो ताकि हम पहली बार साथ जा सकें

    और यह तथ्य कि तुम्हारी चाल इतनी सुंदर है कि ‘फ्यूचरिज़्म’ लगभग अप्रासंगिक हो जाता है

    जैसे कि घर पर मैं कभी भी ‘न्यूड डिसेंडिंग स्टेयरकेस’ के बारे में सोचता या

    किसी रिहर्सल में लियोनार्डो या माइकलएंजेलो की किसी भी ड्राइंग के बारे में, जो कभी मुझे विस्मित करता था

    और वैसे भी ‘इंप्रेशनिस्ट’ की सारी शोध का उन्हें क्या लाभ हुआ

    जबकि वे कभी भी सही व्यक्ति को सूर्यास्त के समय पेड़ के पास खड़ा ही नहीं कर पाए

    या उस संदर्भ में मारीनो मारिनी, जब उसने घुड़सवार को उतनी सावधानी से नहीं चुना

    जितनी सावधानी से घोड़े को

    प्रतीत होता कि उन सभी को किसी अद्भुत अनुभव से वंचित कर दिया गया था

    लेकिन यह अनुभव मुझमें नष्ट नहीं होगा—इसीलिए मैं तुम्हें यह बता रहा हूँ...

    स्रोत :
    • रचनाकार : फ़्रैंक ओ’हारा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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