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शून्य की परिक्रमा

shunya ki parikrama

अनुवाद : शायक आलोक

आना रिस्तोविच

आना रिस्तोविच

शून्य की परिक्रमा

आना रिस्तोविच

और अधिकआना रिस्तोविच

    हम स्वतंत्र स्त्रियाँ हैं

    हम नए प्रेम की प्रतीक्षा करती हुईं हाँफती हुई साँस लेती हैं

    अधूरे वादों की निगलती हैं गोलियाँ

    धुँधले सपनों में

    डूबती चली जाती हैं

    दिन के चौबीसों घंटे

    हम पीड़ापूर्वक एक माइग्रेन के साथ सहवासरत रहती हैं

    और उसे माफ़ कर देती हैं—क्योंकि वह भी मादा है

    हम स्वतंत्र।

    अपने पुरुषों के लिए

    हम वह व्यंजन पकाती हैं जो हमें उनके पूर्वजों ने सिखाए थे

    भगशिश्निका के आकार का पास्ता

    माहवारी के रक्त की तरह टपकता हुआ केचप—फिर भी

    केवल प्लेटें चाटे जाने का वादा

    लेकिन फिर भी हम

    विश्वास रखती हैं नेपोलियन के विजय-द्वार में

    जो चादर और

    रसोई की मेज़ के बीच

    खड़ा हो जाता है

    हम उन्हें वही संगीत सुनाते हैं

    जिस पर हमने

    अपना कौमार्य खोया था

    कामोत्तेजक अंतर्वस्त्रों के बीच

    खोई-खोई-सी

    हम वह अंतर्वस्त्र सँभाल कर रखती हैं

    जिस पर पुराने वीर्य की

    अदृश्य लकीर है

    हम अपने कूल्हे घुमाती हैं जैसे चक्की चला रही हों—

    कुछ देर बाद

    उससे टपकती है

    केवल चिपचिपी कड़वाहट

    फिर भी हम दावा करती हैं

    कि अब हम दो मुँहों के बीच

    एक ही साँस बाँटने में

    विश्वास नहीं करतीं

    और अक्सर हम साँसों से ख़ाली रह जाती हैं

    फिर भी हम कहती हैं

    कि वॉशिंग मशीन का

    सेंट्रीफ्यूज़

    हम केवल उस पर बैठकर ही इस्तेमाल करती हैं—

    तभी अच्छा संभोग हो सकता है

    धोने और रगड़ने में

    कपड़ों की जगह हम डाल देती हैं

    अपनी पतली होती त्वचा के

    टुकड़े

    स्वतंत्र स्त्रियाँ।

    हम अपने बहुत कोमल शब्दों पर

    सेंसर लगाती हैं

    हम भावनाओं के पुनर्लेखन का समर्थन करती हैं

    और उस सिद्धांत का भी

    कि निर्दोष ईव

    पहले बनाई गई थी

    और एडम ने

    ज़हरीला सेब इसलिए खाया

    क्योंकि वह चाहता था

    कि ईश्वर

    साँप से दो और शिश्न रच दे—

    अभागा

    उसे लगा एक काफ़ी नहीं होगा

    हमारा दावा है

    हैं हम पहले से भी अधिक स्वतंत्र

    फिर भी अकेली रातों में

    अपनी कसी हुई योनि में

    हम बार-बार

    एक जादुई उँगली डालती हैं—

    मानो

    उस बंदूक़ में

    गोली भर रही हों

    जो चलने से इनकार करती है

    और हम स्वप्नहीन स्वप्न में

    उदासी से मुस्कुराती हैं

    और वह अनुभवी हाथ

    कोमल शून्य की

    परिक्रमा करता रहता है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : आना रिस्तोविच
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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