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प्रेम

prem

ईमान मर्सल

और अधिकईमान मर्सल

    खिड़की से उसे वर्षों तक देखते रहने के बाद

    और इसे अवसाद-रोधी दवाओं के साथ अपने बैकपैक में रखने के बाद

    प्रेम अचानक वहाँ से फट पड़ता है जहाँ से

    इसकी कोई उम्मीद नहीं होती

    इस स्थिति में साहित्यिक मंशाओं की कोई कमी नहीं है

    जैसे ‘प्रेम’ शब्द पर लगी जंग को खुरचना

    और ‘परित्याग’, ‘जुड़ाव’ और ‘थकान’ जैसे शब्दों को

    उस लार से मुक्त कर लेना जो तब लगे थे जब इन शब्दों को गाया गया था

    यदि तुम एक अरबी कवि हो तो तुमने इस विषय पर ज़रूर ही लिखा होगा

    संभव है तुम वर्षों तक मोह के रेगिस्तान में भटके होगे

    उस पौराणिक पशु की खोज में जो एकमात्र जलस्रोत पर क़ाबिज़ है

    ताकि तुम उसे मार सको

    फिर तुम बस एक घूँट पानी के लिए किए गए

    अपने इस पूर्वनिर्धारित अपराध पर पछताते हुए रोते हो

    और परिवार की गोद में सुरक्षित लौट आने के बाद भी

    कवि ही बने रहते हो

    प्रेम बदनाम है

    प्रेम सबसे ख़राब विषय है—इसमें कोई संदेह नहीं

    मैं जो भी कविता पढ़ती हूँ

    उसमें एक काव्य-प्रेरणा की तलाश करती हूँ

    कवि अपनी प्रेरणा को दीवार पर टाँग देता है

    और पिन लगाते हुए उसके अंग सीधे करता है

    वह छवि, जो प्रेरणा का विषय है

    पीड़िता की आँखों से शुरू होती है

    और आधुनिकतावाद से किसी कवि की निकटता के अनुरूप

    उसकी टाँगों के बीच आकर समाप्त होती है—

    या अधिक से अधिक उसके पीड़ित होने की स्वीकृति पर

    मैंने ख़ाली समय में यह भूमिका निभाई

    और सौभाग्य से मेरी भेंट कभी किसी महान कवि से नहीं हुई

    मैं उन प्रयोगों को प्रेरणाओं के प्रति तिरस्कार के साथ छोड़ आई

    शिफॉन का एक पुल है

    और तुम्हें दूसरे किनारे पहुँचने के लिए इसे पार करना है

    निस्संदेह यह सुरक्षित ठिकाना नहीं है

    वहाँ पहुँचकर तुम पहले जैसे नहीं रहोगे

    क्योंकि तुरंत ही तुम खारे पानी में गिर पड़ोगे

    एक से अधिक हाथ तुम्हें खींचने की कोशिश करेंगे—

    स्वयं को अनुभवी मानने वाले तुम्हारे मित्रों के हाथ

    उन कवियों के हाथ जिनका कार्य ही है इस पतन को देखना

    और अपनी अनिद्रा बिताते एक मनोवैज्ञानिक का हाथ

    उनमें से कोई भी ईश्वर का हाथ नहीं होगा

    इसलिए चिंता की कोई बात नहीं

    सौंदर्य-उत्पादों के विज्ञापनों की उँगलियाँ

    तुम्हारी ओर बढ़ेंगी

    तुम्हें एक छिली हुई चमकदार त्वचा देने के लिए

    और फिर तुम्हें दोबारा गिरने का डर नहीं रहेगा

    प्रेम हमें प्रामाणिक और स्वार्थी बनाता है—

    सचमुच स्वार्थी,

    और अपने स्वार्थ में भी प्रामाणिक… वग़ैरा-वग़ैरा

    उसके बाद कुछ भी पर्याप्त नहीं लगता,

    मानो ‘संतोष एक अनंत कोष है’ कहने वाले ने

    इंद्रियों को शून्य स्तर पर जड़ दिया हो

    और रेगिस्तान की ओर चल पड़ा हो

    कोई परिचित-सा धुन सीटी में बजाते हुए।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ईमान मर्सल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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