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कुतिया

kutiya

अनुवाद : शायक आलोक

कैरोलिन काइज़र

और अधिककैरोलिन काइज़र

    अब इतने वर्षों के बाद

    जब भी वह और मैं कभी मिलते हैं

    मैं अपने भीतर की कुतिया से कहती हूँ—

    गुर्राना शुरू मत करना

    वह अब कोई घुसपैठिया नहीं है

    बस एक पुराना परिचित है

    टोपी उठाकर अभिवादन करता हुआ

    “तुम्हें देखकर अच्छा लगा,”—कहती है मेरी आवाज़

    जबकि मेरे भीतर की कुतिया

    पागलपन में भौंकने लगती है

    अरे वह अब दुश्मन नहीं है

    क्या तुम में तमीज़ नहीं है—कहती हूँ उसे

    और इधर पूछती जाती हूँ

    “और, बच्चे कैसे हैं?

    वे बड़े हो रहे होंगे।”

    उसके एक स्नेहिल शब्द

    पुराने दिनों जैसी एक नज़र भर पर ही

    कुतिया का स्वर बदल जाता है;

    वह कूँकने लगती है

    उससे सट जाना चाहती है

    सिमट जाना चाहती है

    शांत बैठो, लड़की!

    दूरी बनाए रखो

    वरना मैं तुम्हें

    गला-घोंटने वाली ज़ंजीर का

    स्वाद चखाऊँगी

    “ठीक हूँ, बिल्कुल ठीक,”

    मैं उससे कहती हूँ और इधर यह

    लार टपकाती है

    और गिड़गिड़ाती है

    आख़िर मैं उसकी मालकिन हूँ

    वह तो वफ़ादार ही है

    बस उसे यह याद है

    कि वह कैसे हर शाम

    उसके क़दमों की आहट सुनते ही

    दौड़ती हुई आती थी

    कैसे वह उसके पैरों में लोटती थी

    और भक्ति-भाव से उसे देखती थी—

    जबकि वह अपने अख़बार में

    ही डूबा रहता था

    या उसकी भक्ति से ऊबकर

    उसे रसोई में भेज देता था

    जब तक कि वह खेलने के लिए

    तैयार हो जाए

    लेकिन उसकी छोटी-छोटी

    लापरवाह दयालुताएँ—

    जब उसका दिन अच्छा होता

    या उसने दो पैग लगा रखे होते—

    अब उसे याद आती हैं

    और अधिक महत्त्वपूर्ण लगती हैं

    उन सामान्य क्रूरताओं से

    उस अंतिम विदाई से

    “यह जानकर अच्छा लगा

    कि तुम इतना अच्छा कर रहे हो,”

    उससे कहती हूँ मैं

    वह तुम्हें अपने साथ नहीं ले जा सकता था

    तुम बहुत भाव दिखाने वाली थी

    बहुत भद्दी थी

    उसके नए दोस्तों के

    सजे-धजे पालतू पशुओं जैसी नहीं थी

    “अपनी पत्नी को मेरा नमस्कार कहना,”

    उससे कहती हूँ

    तुम्हारा दम घुटता है

    जब मैं तुम्हें

    गर्दन की खाल से पकड़कर

    घसीट ले जाती हूँ

    उधर उससे कहती हूँ—

    “अलविदा! अलविदा!

    तुमसे फिर मिलकर

    अच्छा लगा।”

    स्रोत :
    • रचनाकार : कैरोलिन काइज़र
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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