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टूटता स्वप्न

tutta svapn

कुमार विक्रमादित्य

कुमार विक्रमादित्य

टूटता स्वप्न

कुमार विक्रमादित्य

और अधिककुमार विक्रमादित्य

    रात जब अपनी चादर से सभी को ढँक लेता है

    तो खुलती है दूर पहाड़ी पर दो आँखें

    जो खोजती है

    कल का भविष्य ओझल तारों के मध्य

    मगर बंद हो जाते हैं रास्ते

    जब उसे कुछ भी दिखाई नहीं देता अँधेरे में

    उठने की कोशिश में

    टकराता है वह पत्थरों से

    आँखों का चश्मा टूट जाता है

    साथ ही टूटता है स्वप्न

    फिर अँधेरे से लड़ने जलाता है लालटेन

    उसे दिखता है

    एक फुफकार मारता

    काला नाग

    जो तैयार है डसने उसके सपनों को

    सुला देना चाहता है वह

    सदा के लिए

    ग़रीब और ग़रीबों के सपनों को

    क्योंकि उन्हें पता है कि

    अमीरों के सपने बंद होते हैं

    कई सुरक्षा कवचों के बीच

    तभी आती है जोड़दार आँधी और बारिश

    लालटेन लड़ता है आकाशीय बिजली से

    हवा के थपेड़ों से

    मगर कोई उसे नहीं बुझा पाता

    क्यूँकि उसने भी ओढ़ रखे हैं

    ग़रीबी का सीसा अपने ऊपर

    तभी गर्म सीसे पर पड़ती है ठंढी बूंदें

    और चन से चनाक हो जाता है

    आकार लेता सुंदर स्वप्न।

    स्रोत :
    • रचनाकार : कुमार विक्रमादित्य
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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