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तोहरे दरसन खातिर भोले

tohre darsan khatir bhole

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

तोहरे दरसन खातिर भोले

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    हमरे सजना कै अँगनवा बड़ा नीक लागै हो,

    होइहैं उनसे जौ मिलनवा बड़ा नीक लागै हो,

    साँझ सवेरे द्वारे तोहरे दुखिया सीस झुकावै,

    जेहकै माँगन पूरा होयगा खुसियाँ खूब मनावै,

    पउबै हमहूँ जो मँगनवा बड़ा नीक लागै हो।

    हमरे सजना कै...

    तोहरे दर्सन खातिर भोले हमहूँ आस लगाये,

    जब-जब तोहें देखा अपने नैन कै प्यास बुझाये,

    मिलिहैं चरनन मा ठेकनवा बड़ा नीक लागै हो।

    हमरे सजना कै...

    बिपत्ति परी जौ हमरे उपरा तोहरे नाव पुकारे,

    धीरे-धीरे नइया हमरी बिधिना पार उतारे,

    बसब्या हमरे जौ नयनवा बड़ा नीक लागै हो।

    हमरे सजना कै...

    हे मोरे दाता तोहरे नगर के बतिया बहुत निराली,

    खाली केहु जाई साँई घर से तोरे सवाली,

    तोहरा सुन्दर रूप सजनवा बड़ा नीक लागै हो।

    हमरे सजना कै...

    हमका अपने हाथे कै तू दै द्या एक निसानी,

    भोले तोहरे नाव कै गितिया गावत कटै जवानी,

    जरिहैं दियना पै 'परवनवा' बड़ा नीक लागै हो।

    हमरे सजना कै...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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