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थोड़ी-सी जगह

thoDi si jagah

चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

थोड़ी-सी जगह

चंद्रेश्वर

और अधिकचंद्रेश्वर

    रेल की इस जनरल बोगी में चाहिए मुझे

    थोड़ी-सी जगह

    जहाँ रोप सकूँ मैं

    अपने पैर

    किस कदर भरी है बोगी

    ठसा-ठस

    खिड़कियाँ तक ढँकी हैं

    भीड़ से

    कहीं कोई सुराख़ नहीं

    कि आ सके इसमें

    ताज़ा हवा

    मौसम भी उमस भरा

    चिपचिपा

    कोई गुंजाइश नहीं

    ज़रा भी

    कोन चाहेगा होना बेदखल

    अपनी जगह से

    ऐसे में हो रहा दूभर

    साँस लेना

    अब मैं एकदम नाउम्मीद

    कि पाना जगह बोगी में

    थोड़ी-सी भी

    नामुनकिन

    यूँ ही काटना होगा सफ़र

    किसी तरह टिकाए पैर

    उँगलियों पर...

    कि खिड़की के पास

    सीट पर बैठा आदमी सिकुड़ते हुए

    तनिक बनाता है मेरे लिए

    थोड़ी-सी जगह!

    स्रोत :
    • रचनाकार : चंद्रेश्वर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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