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तेंतीस पर

tentis par

अनुवाद : रमेश कौशिक

दिमितेर स्तेफानोव

और अधिकदिमितेर स्तेफानोव

    तेंतीस वर्ष की उम्र में

    (अंतरिक्ष युग के बीच

    ईस्वी वर्षों के बीच

    ज़िंदगी के आधे सफ़र के बीच)

    अपनी आधी ज़िंदगी से

    विदा ले चुका हूँ।

    तेंतीस वर्ष की उम्र में

    मैं, जो कभी हिसाब में बहुत निपुण था

    जो सबसे ख़ास बात समझ पाया हूँ

    और जिसका प्रयोग करता है

    मेरा झंडा-युग

    एटम और रॉकेट

    साइबरनेटिक्स और छापे

    प्लास्टिक और भाषण

    वह सबसे ख़ास बात है :

    भाग दो का।

    आज विभाजित हैं सारी ही वस्तुएँ

    प्रकृति : उत्तर और दक्षिण में

    आदमी : पूरब और पश्चिम में

    दुनिया विभाजित है

    दुश्मनों और पागलों में।

    तूफ़ान जो कभी अविभाज्य थे

    अब बँटे हैं जल्दी उठकर समाप्त होने वाले

    और बार-बार उठते रहने वाले।

    मित्र विभाजित हैं

    जो कल के हैं और जो आज के हैं

    यहाँ तक कि परदे भी दो प्रकार के हैं

    लेस के और आयरन के

    जब तुम मेरी अंकशायिनी होती हो

    तब दो हरी आँखें

    मुझे दूसरी औरतों से अलग करती हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : बल्गारियाई कविताएँ (पृष्ठ 124)
    • संपादक : रमेश कौशिक
    • रचनाकार : दिमितेर स्तेफानोव
    • प्रकाशन : पराग प्रकाशन
    • संस्करण : 1985

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