Font by Mehr Nastaliq Web

तनाव में बहिनें

tanav mein bahinen

कृष्ण चंद्र मिश्रा

कृष्ण चंद्र मिश्रा

तनाव में बहिनें

कृष्ण चंद्र मिश्रा

और अधिककृष्ण चंद्र मिश्रा

    रोज़ की एकरस उबाऊ दिनचर्या के बाद

    फुरसत के कुछ पल चुराकर

    वे खोलतीं हैं टेलीविजन

    लगाती है न्यूज़

    हर चैनल पर

    चीख़ते-चिल्लाते, पशुओं से लड़ते

    कोरोना से होती हर मौत का तमाशा बनाते

    एंकर

    ऑक्सीजन की कमी से तड़पते मरीज़

    रोते परिजनों के आँसू धुले चेहरे

    मुस्कुरा कर दिखाते—रिपोर्टर

    बीमारी की भयावहता को बताते डॉक्टर

    पूजा के नाम पर चौराहों में

    नेताओं का लबादा ओढ़े गधों द्वारा

    रोके जाते ऑक्सीजन टैंकर

    देखकर रुक जाती हैं

    बहनों की साँसें

    वे आँखों की गीली कोर पोंछती

    भगवान से माँगती है दुआएँ

    ख़ैरियत की।

    करती हैं अपनी नींदें हराम

    किसी अनहोनी की आशंका से घिरे

    तन-मन से,

    उनका बस चले

    तो ख़ुद चली जाएँ काम पर

    बेटे/पति/पिता की जगह

    बचाने अपने परिवार को इस बला से

    बढ़ चुका है उनकी पूजा-पाठ का समय

    बढ़ चुकी हैं दूरियाँ

    पड़ोसी सहेलियों से

    नहीं निकलती घर से बाहर

    भूल चुकी हैं मन बहलाव को भी

    ख़ुद के लिए

    और कठोर कर चुकी हैं चारदीवारी की क़ैद को

    कठिन हो चुका है उनका काम

    आराम का समय शून्य से नीचे जा चुका है

    जब घर में कोई नहीं होता

    तो कुछ पल वह अपने लिए निकाल लेती थीं

    लेकिन आज

    सबकी आशाएँ, उम्मीदें, फ़रमाइशें बढ़ चुकी हैं उनसे

    वे बिना कुछ कहे

    सहती ही जा रही हैं

    अपने पर ज़ुल्म

    अपनों की ख़ातिर,

    चाहती हैं

    एक लम्बा विश्राम

    अपने पारिश्रमिक रहित काम से

    लेकिन कह नहीं पाती

    बड़ा मन है उनका

    बिना मास्क के, लम्बी दूरी तक

    सैर पर निकलकर, ले सकें लम्बी सांसें

    एहसास कर सकें

    उस ठंडक का

    जिसे महसूस किए एक अरसा हो गया।

    स्रोत :
    • रचनाकार : कृष्ण चंद्र मिश्रा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY