Font by Mehr Nastaliq Web

तमगा

tamga

बिभा विमर्श

और अधिकबिभा विमर्श

    नहि चाही हमरा

    मान-सम्मान

    आकि कोनो तमगा

    जकर प्रतीक्षामे

    लेड़ चुअबैत बैसल छी

    गड़ौने दुनू अपन आँखि—

    नहि जानि कतेक बर्खसँ

    जे राखिकऽ संग

    जुड़ा लेब अपन आत्मा

    जोगाड़सँ भऽ जायब कृतकृत्य

    अहाँक जन्मक सफलताक

    वएह रहल एकमात्र बाट

    हम मुदा कहियो

    नहि चललहुँ ओहि घाट

    नहि रहल एहन कोनो कामना

    हमर भाषा

    बुझि रहल छी ने

    हे साहित्य-मठक अधीश!...

    चाहे जतेक बेर

    करैत रहू अपमानित

    करैत रहू बेर-बेर तिरस्कार

    तोड़ैत रहू शब्दक बाणसँ

    बेधैत रहू हमर तन्नुक करेज

    टुटबा लेल

    हमर जन्म नहि भेल अछि

    हमरा बूझल अछि

    अहाँक कोकनल अभिमान

    हमहूँ कोनो फोंक नहि छी

    बच्चेसँ सभ

    हमरा अस्सब कहैत रहल अछि

    जे आइ समयक थापड़ खाइत

    बनि चुकल अछि सख्त चट्टान!

    स्रोत :
    • पुस्तक : नहि सीता नहि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 94)
    • रचनाकार : बिभा विमर्श
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2023

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY