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स्वीकृति का सवाल

svikriti ka saval

पल्लवी जयराम

पल्लवी जयराम

स्वीकृति का सवाल

पल्लवी जयराम

और अधिकपल्लवी जयराम

    नकार में भी घूम-घूम

    स्वीकृत तलाशने वाले

    तलाश लेते हैं,

    परंपरा में आधुनिकता

    संदेह में विश्वास और

    अपमान में दिल्लगी की ख़ूबियाँ।

    स्त्री में तो अति–मानवीय गुण

    हमारी सभ्यता हमेशा देखती रही है

    पुरातन से अधुनातन तक

    जहाँ नारी

    सब सवालों का जवाब है

    वहीं नारी के सवालों का

    कोई जवाब नहीं।

    कितना छटपटा जाता है

    हमारा सभ्य–समाज

    जब स्त्री स्वयं सवाल के रूप में सामने आती है।

    स्त्री का सवाल हो जाना

    पुरुष के बुद्धत्व पर प्रश्न खड़ा करना है

    जिसका सत्य, शून्य, शांति

    बिना स्त्री के दमन मिल ही नहीं सकती।

    स्वीकृति का सवाल ही

    अहंकार पर हमला है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पल्लवी जयराम
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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