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स्वप्न-नाच

svapn naach

सुमेधा

सुमेधा

स्वप्न-नाच

सुमेधा

और अधिकसुमेधा

    हम बहनों को

    नाचना बहुत अच्छा लगता

    और घर के पुरुषों को अश्लील

    हम जब भी मौक़ा पातीं

    छुपकर नाचा करती

    एक-दूसरे से कहती

    बड़े शहरों में सुना है बाप बेटी साथ में नाचते हैं

    पर यह इतना दूर था हमारी कल्पना से भी

    कि अथक प्रयास के बाद भी

    इसका कोई दृश्य मन में नहीं उभरता

    अब हम घर से दूर हैं

    एक बड़े शहर में

    जहाँ बाप बेटी साथ में नाचते हैं

    हम दोनों ऐसी महफ़िलों में

    एक-दूसरे की ओर देखते हैं

    सकुचाकर मुस्कुराते हैं

    कभी-कभी वह कहती है :

    सोचऽ पिताजी भी हमनी के साथ कभी अइसे नचतवअ तब?

    पर इतना दूर है दृश्य मेरी कल्पना से भी

    कि अथक प्रयास के बाद भी

    इसका कोई चित्र मन में नहीं उभरता।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुमेधा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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