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सुनो सखियो

suno sakhiyo

ममता धवन

ममता धवन

सुनो सखियो

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    कभी आओ

    मिल बैठें...

    याद करें

    वो तमाम दिन

    वो अल्हड़ बातें

    वो टीचर की झिड़कें

    कैंटीन के समोसे

    क्लास में पर्ची चलाना

    लेक्चर के दौरान

    छुप-छुप हँसना

    कभी लेक्चर मिस करना

    बैठना हरी घास पर

    पैदल जाना कॉलेज

    लौट के आना भी पैदल

    इकोनॉमिक्स ट्यूशन की वो सर्द सुबह

    कभी हिंदी के बोरिंग लेक्चर

    अंग्रेज़ी का वो कभी समझ न आया जूलियस सीजर

    हिस्ट्री की लड़ाइयों को याद करते-करते थकना

    वो पंजाब के नक्शे पर

    कभी नदियाँ तो कभी लड़ाई के स्थान ढूँढ़ना

    वेलकम पार्टी की ड्रेस में उलझना

    बारा नंबर के चक्कर लगाना

    फेयरवेल का जश्न मनाना

    विदाई के गीत रिकॉर्ड करवाना

    सुंदर पर्चियों पर कमेंट्स लिखना

    तोहफ़े लाना

    और मनी कलेक्शन पर हफ़्तों हफ़्ते लड़ना

    एन एस एस कैंप में गली-गली घूमना

    सर्द सुबह बस स्टैंड से एक साथ बस पर कूद पड़ना

    ट्रैक्टर पर घूमना

    आर्यसमाज की रैलियों में भजन गाना और

    साड़ी पहनने के लिए सर की गुहार लगाना

    यज्ञों में एक साथ सन्निधाओं को डालना

    टीचर डे पर टीचर की पार्टी करना

    स्कूटी चलाना

    साइकिल चलाना

    पीछे पड़े लड़कों के कारनामे डिसकस करना

    एग्जाम का प्रेशर

    और एक बार ग़लत समय पर सेंटर पहुँचना

    आधा घँटा देरी पर अपना सर धुनना

    आओ मिलते हैं न

    याद करते हैं

    जी लेते हैं उस वक्त को

    कुछ अपने कहते हैं

    बात बढ़ाते हैं

    इस अंतराल को भरते हैं

    आ जाओ सखियो॥

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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