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स्थगित आत्महत्याएँ

sthagit atmhatyayen

पूजा कुमारी

पूजा कुमारी

स्थगित आत्महत्याएँ

पूजा कुमारी

और अधिकपूजा कुमारी

    बासन में रखे नमक की तरह

    गल रहे सपने

    जीवन का स्वाद

    अवसाद की ओर बढ़ रहा

    मैं मान्यता विहीन ज़मीन पर उपजी हुई

    अनचाहे गर्भ की तरह

    अनपेक्षित दूब हूँ

    कई जोड़ी पैर रौंदते हुए आएँ

    मेरी पीठ पर अस्वीकृत लिख गए

    बियाबान अँधेरे में भटकती

    वक्त के आइने में अपना अदृश्य चेहरा ढूँढ़ती हूँ

    मुझे गुमशुदा होने का भय सताता है

    अपनी चुप्पियों में चीख़ती हूँ

    टूटती हैं दीवारें जिनके निशान मौजूद नहीं

    अस्वीकृत की आग में धधकती दुनिया को छोड़कर

    मैंने स्वीकार ली हैं अस्वीकृतियाँ मौन

    स्थगित आत्महत्याओं के नाम

    लिखी है पाती

    सब कुछ ख़त्म हो जाने के बाद भी

    कुछ कुछ बचा रहेगा जीवन में

    शुरू से शुरू करने के लिए।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूजा कुमारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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