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सृजन-संधान

srijan sandhan

विकास वत्सनाभ

विकास वत्सनाभ

सृजन-संधान

विकास वत्सनाभ

और अधिकविकास वत्सनाभ

    ऋतु सभक संहतिमे

    बिहाड़ि, पानि, पाथर सहैत

    अम्मत टिकुला बनैत अछि मधुरफल

    धैरजसँ सींचल संघर्ष फलीभूत त' होइते छैक

    पड़िबाक सियाह रातिसँ

    चान घीचि अनैत अछि दप-दप इजोरिया

    पक्ष बीतय धरि अन्हार काटय त' पड़िते छैक

    गंतव्यक हेतु अपसियाँत भगैत लोकक

    पाथेय होइत अछि संयमित प्रतीक्षा

    गुंजित दीपक राग सजयबामे रेयाज त' लगिते छैक

    जिनगीक बाटमे ओहिना अबैत अछि भदबा

    जेना फूलक दोगमे अबैत अछि काँट

    फूलक छाहक अछैत काँटक धाह त' रहिते छैक

    पीपरक पातपर पसरल निमुन्न अन्हारसँ

    सुरुजक असोरा धरि लीख बनबैत

    सगर राति मेहिआयल बरैत अछि भगजोगनी

    भोरक उजास लेल राति काटय त' पड़िते छैक

    ओसक बुन्नसँ नहायल सिंगरहार

    जखन गमैत अछि किरिनक आगम

    पिरथीक आँचरमे झहरि

    अँगेजि लैत अछि माटिक सुगंधि

    माटिक सुगंधि हेतु जड़ि धरय त' पड़िते छैक

    एखन जे लहालोट करैत अछि तीसीक फूल

    मेहाँ-ननकारक बाधमे

    अगबे कुसे जनमैत रहैक एहि पाँतरमे

    परतीकें खेत बनबयमे घाम त' लगिते छैक

    समय त' लगिते छैक सृजन-संधानमे

    समस्या अछि जे समय छैक कहाँ किनको लग

    स्रोत :
    • पुस्तक : नेपथ्यसँ अबैत हाक (पृष्ठ 23)
    • रचनाकार : विकास वत्सनाभ
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2025

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