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छाँड़ि-छाँड़ि अगर-मगर

चलउ भाई डगर-डगर!

जोति भइ मलीनि तउनि

जागि उठयि जगर-मगर।

चलउ भाई डगर-डगर।

लरिका चिल्लायि चले,

बिटिया बिल्लायि उठी;

राँह भइ कुराँह तिहिते

पाउँ परयि लहर-बहर।

चलउ भाई डगर-डगर।

बरन बने चारि मुलउ

जाति दददू! याकयि आयि?

छुआ-छूति छोपि, बूड़े

जाउ काहे हपर-हपर

चलउ भाई डगर-डगर।

जिहि मा सुख होयि, तउनि

राँह चलउ नीकि नीकि।

कोई करयि चहयि तउनु,

तुम करउ सगर-बगर।

चलउ भाई डगर-डगर।

आपुस की फूट अयिसि

बढ़ी हयि कि रामु हरे।

लड़उ रोजु-रोजु, मरउ

भूँखन कयि हकर-हकर।

चलउ भाई डगर-डगर।

मुसलमान, हिन्दू अउ,

किरिहटान सबु कोई,

हिलि-मिलि कयि चलउ,

नाहीं धरे रहउ सटर-पटर।

चलउ भाई डगर-डगर।

तुम बड़े पढ़ीस हउ

खुबयि खूब पढ़ि, स्वाचउ।

धरमु चिल्लाति हयि तुम

देखि रह्यउ भटर-भटर।

चलउ भाई डगर-डगर।

स्रोत :
  • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 109)
  • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
  • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
  • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
  • संस्करण : 1998

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