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शब्द सारे मौन हैं

shabd sare maun hain

रत्नेश अवस्थी

रत्नेश अवस्थी

शब्द सारे मौन हैं

रत्नेश अवस्थी

और अधिकरत्नेश अवस्थी

    शब्द सारे मौन हैं अब अर्थ भी मूर्छित हुए हैं।

    कोयलों की सुर परीक्षा काग सब चयनित हुए है॥

    देखकर रंग बादलों का आसमाँ भी झुक गया है,

    चाँद जो रोशन हुआ तो सूर्य भी अब रुक गया है,

    यूँ तो निजता की कहानी अब बज़ारू हो गई है,

    कौन है जो सर उठाए कह अँधेरा छुप गया है,

    अन्चुरों की इस प्रलय में हंस सब चिंहित हुए हैं।

    कोयलों की सुर परीक्षा काग सब चयनित हुए है॥

    केर के हर पेड़ को अब बेर छलता जा रहा है,

    मोम से धागा नहीं अब मोम जलता जा रहा है,

    मुड़ गईं हैं सभ्यता से इस कदर सबकी निगाहें,

    द्वेष हर दिल में यहाँ पर ऐसे पलता जा रहा है,

    योग्यता ने क्या सिखाया क्यों सभी चिंतित हुए हैं?

    कोयलों की सुर परीक्षा काग सब चयनित हुए है॥

    सभ्यता का इस कदर शोषण यहाँ होता रहा,

    इस दनुजता का अगर रोपण यहाँ होता रहा,

    तब हमारी पीढियाँ भी जन्म से मर जाएँगी,

    मानवीय द्वेषत्व का पोषण यहाँ होता रहा,

    राम के इस देश में रावण अभी अगनित हुए हैं।

    कोयलों की सुर परीक्षा काग सब चयनित हुए है॥

    जीवन की पतली पगडँडी, पाँव थके हम हारे

    आज यही हम सोच रहे फिर, बैठे नदी किनारे...

    लहरें ऊपर, ऊपर आँसू, नीचे थी ख़ामोशी,

    और हवाएँ बता रहीं मैं, किसका कितना दोषी,

    किन अपराधों में खोई है, पूंजी इस जीवन की,

    कैसे कोई जान सकेगा, बेचैनी इस मन की,

    बैठा दूर क्षितिज में कोई, ले कर नाम पुकारे,

    आज यही हम सोच रहें फिर, बैठे नदी किनारे...

    कैसे मिल जाते हैं जल में, रेत बने कुछ टीले,

    कैसे प्रेम भरे बंधन भी, पड़ जाते हैं ढीले,

    कैसे लहरें छूना चाहें, तट पर रुकना चाहें,

    कैसे अनगढ़ शब्द हमारे, सब कुछ कहना चाहें,

    कैसे छिप जातें हैं दिन भर, नदिया में सब तारे,

    आज यही हम सोच रहें फिर, बैठे नदी किनारे...

    कोई तो नदिया के उद्गम, पर भी रहता होगा,

    जो अंदर ही अंदर अपने, मन में दहता होगा,

    जो लहरों के साथ नदी में, बहकर जीता होगा,

    जो अपने आँसू अपनी, आँखों से पीता होगा,

    रोज़ बिछड़ जाते होंगे सब, उसके अपने प्यारे,

    आज यही हम सोच रहें फिर, बैठे नदी किनारे...

    स्रोत :
    • रचनाकार : रत्नेश अवस्थी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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