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सेरायल प्रेम

serayal prem

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

सेरायल प्रेम

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    अहाँक स्मृतिक नोरकेँ

    बहबय नहि चाहैत छी हम।

    ओकरा बनायब एकटा ज्वालामुखी

    जबकल गन्हकौआ पानिकेँ

    बहा देबइ बनाकऽ गर्म लावा।

    अहाँक घमंडकेँ

    नादानी मानि हम क्षमा नहि कऽ सकब

    बना लेब ओहिसँ एकटा रोशनाइ

    लिखि देबैक संसारक आँखिमे

    एकटा नवका मिट्ठ गीत।

    सुनरताइक हेठीकेँ बिसरब

    हम किन्नहु नहि

    घमाकऽ बनायब ओकर

    एहन शांति जल

    जे सब अभिशप्तकेँ

    शापमुक्त करबामे होइक समर्थ।

    अहाँक विस्मृत सिनेहकेँ

    दर्द बनयसँ पहिले

    लेबऽ चाहैत छी उसिनि

    अपन रक्तक संग

    बँचि सकय कहुना

    शेष सम्बन्ध-सूत्रोएबासँ सर्द।

    अपमानक कालिमासँ हम

    बनि जायब एहन खटखट जे

    आर कतहु नहि बचतइक अन्हरिया

    काजरो लेल भेटत नहि अहाँकेँ

    कतहु कनियो करिखा शेष

    तखन इजोतसिँ हम

    पड़ैत रहब अहाँकेँ मोन।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 32)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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