Font by Mehr Nastaliq Web

सारी लड़ाई भेड़ और शेर बनने की है

sari laDai bheD aur sher banne ki hai

सुमन शेखर

सुमन शेखर

सारी लड़ाई भेड़ और शेर बनने की है

सुमन शेखर

और अधिकसुमन शेखर

    किसी भी चीज़ को बहुत छोटे कोने से देखना

    अधूरा सच देखना है

    सच की सीरत है बदलते जाने की

    हम जिसे देखकर हँसते हैं

    कोई हमें भी देखकर हँसता है

    श्रृष्टि किसी शेषनाग या कछुए पर नहीं टिकी है

    वह टिकी है महज़ एक शब्द पर—‘उम्मीद’

    किसी भी चीज़ पर आस्था

    शक्ति की तरह काम करती है

    आस्था ऐसी हो जो मानवीय बनाती हो

    मनुष्य एक ऐसी प्रजाति है

    जिसमें जीवित बचे रहने के लिए

    स्व से अधिक दूसरों पर विजय की इच्छा कुलबुलाती रहती है

    लंबे इंतज़ार और बेमुफ़ीद सांस वाली वाली ज़िंदगी में

    हर तरफ़ ख़तरा ही ख़तरा है

    रुकने में, चलने में, कहीं पहुँचने में,

    पीछे मुड़ने में, देखने में, काँपने में और सोचने में

    नैतिकता की सारी लड़ाई

    भेड़ और शेर बनने की है

    चुनौतियाँ बड़ी हों

    तो सबसे पहले

    डरे हुए सभ्यता का ही लोप होता है

    अच्छाई के भीतर कई सारी अनुबंधित धाराएँ भी समाएँ

    तो उसका विस्तार और शुद्धीकरण हो जाता है

    मनुष्य से मनुष्यतर पहुँच

    साबुत बचे रहने की राह में

    मनुष्यता का बचना ज़रूरी है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुमन शेखर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY