Font by Mehr Nastaliq Web

समझा फागुन आ

samjha phagun aa

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

समझा फागुन आ

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    फसल गरभ निअराइ समझा फागुन

    गेहूँ जब गदराइ समझा फागुन

    चलै फगुनहट पीपल पात मगन झूमै

    पुरवाई दुलराइ समझा फागुन

    सूरज आँखी लगा लिलोरइ धरती के

    जाड़ा गवा डेराइ समझा फागुन

    साँस साँस मधुमास की मादकता छाई

    सेमल फूल ठठाइ समझा फागुन

    कोयल गान कान में मिसरी रस घोलै

    अमराई बौराइ समझा फागुन

    सून सेजरिया अँसुवन के धार बहै

    गोरी दुख गरुआइ समझा फागुन

    ननद चुलबुली भउजाई के छेड़ रही

    भउजी जब फुहराइ समझा फागुन

    अइया के खोड़री अँखियन काजर सोहे

    बुढ़ऊ जब देवराइँ समझा फागुन

    ढोलक झाँझ मृदंग चंग जस बजत रहे

    ओइसे फिर बजि जाइ समझा फागुन

    जात पाँत पहनावा बोली बानी के

    भेदभाव मिटि जाइ समझा फागुन

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 77)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY