सजनी

sajni

कि सजनी अब तो रहा जाए

पानी में तेज़ाब घोल दे नदी चुरा ले जाए

रात बनाए रक्खे कोई दिया जलने पाए

गाना इतना तेज़ लगा दे बात होने पाए

हवा धुएँ से भर दे सीधे पेड़ काटने आए

बात कहो तो हाथ पकड़ ले औ' पिस्तौल दिखाए

बहुत प्यार करने का वादा करके घर आए

कि साजन सत्ता होता जाए

कि साजन कुत्ता होता जाए

कि सजनी अब तो रहा जाए

स्रोत :
  • रचनाकार : देवी प्रसाद मिश्र
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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