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साच्छरता

sachchharta

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

साच्छरता

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    हिय में अज्ञान के सूल चुभै

    निर्मूल भई हमरी जिनगानी।

    गुन ज्ञान बिना सिंगार बिथा

    जस पान झुराइ गयो बिनु पानी।

    हमहूँ सिखबइ

    हमहूँ पढ़बइ कबिता अउ कहानी।

    हमहू मन में प्रन ठानि लिहा

    पिया अब लगउबै अँगूठा निसानी।

    परदेस के पाती तोहार मिलै

    कभौं एसे बँचाईं अउर वोसे बँचाईं।

    करिया अछरवा चिन्हाइ नहीं

    चिठिया लिखवावै बदे घिंघिआईं।

    मनवाँ में कलेस मोरे हरदम

    पिया अउँठा लगावत की सरमाईं।

    जियरा मोरे धीरज होई तबै

    जब हम सिखि लेब पढ़ाई लिखाई।

    कर जोरि कहौं मानो बात मोरी

    पिया जाइ बजार किताब लिआवा।

    अज्ञान कलंक मिटै हिय सो

    मोरे जीवन के अन्हियार मिटावा।

    सिच्छा के इच्छा प्रबल मन में

    अब अउर प्रतिच्छा ना मोसे करावा।

    पइसा होय करधनी बेचि द्या

    आगे एकइ बहाना बनावा।

    अन्हियार मिटाइ अँजोर करब

    घर-घर गुन ज्ञान की ज्योति जलउबै।

    माई-बहिन कुल लरिका-गदेला

    बटोरि बटोरि पढ़उबै लिखउबै।

    मनवा बिस्वास अउ आस जगै

    जन जीवन में नव विहान लिअउबै।

    दुखवा-सुखवा के मइ साथी तोहार

    कदम से तोरे मइ कदम के मिलउबै।

    इस्कूल चलो! इस्कूल चलो!!

    इस्कूल चलो के लगाउव नारा।

    अब सिच्छा के क्रांति बयार वही

    गुन ज्ञान के गंगा की फूटिहैं धारा।

    हम गाँउ समाज के काज के खातिर

    करबइ समर्पित जीवन सारा।

    त्याग अउर बलिदान करब पिया

    प्रान से प्यारा बा देस हमारा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 43)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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