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रिश्ते दिलफरेब

rishte dilaphreb

ममता धवन

ममता धवन

रिश्ते दिलफरेब

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    आशा की दोपहर में

    निराश शामों को तपा दिया मैंने

    ढकोसलों से भरे रिश्तों से

    दामन छुड़ा लिया मैंने

    ख़ून जिनका ठँडा हैं

    उन अवसादों से खुदी को बचा लिया मैंने

    ईर्ष्या घृणा जलन नफ़रत है जहाँ

    अपने सम्मान को बचा लिया मैंने

    सख़्त तानाकशी के उजड़े नगर

    अपना चाँद छिपा लिया मैंने

    नाउम्मीदियों से भरे खून के रिश्ते

    गैरों को अपना बना लिया मैंने

    भविष्य जहाँ स्याह है

    हरसिंगार उगा लिया मैंने

    तेज भागती दुनिया में

    अपना पिंजड़ा बना लिया मैंने

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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