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राजा के बखरिया में

raja ke bakhariya mein

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

राजा के बखरिया में

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    खुनवा पसीनवाँ से सिंचतेंउ खेतिया के हार चमकइ हो।

    हमरे अँचरा में नाहीं एकउ दनवाँ कि राजा के बखरिया में बा॥

    राजा पावइँ ताज तखतवा सिंगार तिलकवा हो।

    राजा सुतई अपने महला पलंगिया कि हमरे झोपरियउ बा॥

    राजा जी के घोड़ हिहिनान झालर झुलइ मोतियन हो।

    राजा पहिरइँ आपन मलमल के पगवा कि हमरे लुगरियउ बा॥

    राजा जी के अंगना बहार आवइ बिजुरी अंजोर मारइ हो।

    फुलबगिया से महकइ दुअरवा कि गउँना अन्हेंरियइ में बा॥

    खेतवा मा पहरा लगउतेंउँ राजा बघवा तकउतेउँ हो।

    रउँदे छतिया पे जुलमी फउजिया केउ बात सुनवइयउ बा॥

    राजा जी के सेनवाँ जुलुम करे घरवा बेघर करे हो।

    अब सहबइ राजा के गुलमियाँ कि मुकुति कुदरियइ में बा॥

    बिगड़ा वा सगरौ कनुनाँ गरिबवन के कोउ नाहीं हो।

    गरिबा बान्ह आपन जूझइ के संघतिया कि सुखवा अजदियइ में बा॥

    1984

    (रामगढ़) डैया में लिखी गयी)

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

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