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रात तड़पावे जियरवा

raat taDpave jiyarva

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

रात तड़पावे जियरवा

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    नाहीं भोरहिया निसान रात तड़पावे जियरवा।

    आजउ झोपरिया मा पाख अन्हियारा महला में चमकइ अंजोर।

    एक-एक दनवा पे मलिका के नमवाँ ओनही के होइगा विहान॥

    रात तड़पावे जियरवा।

    ओनही के राज मिला ओनके अजादी

    पाँउ परी हमरे जंजीर।

    सुधिया लेइँ कोनो नेतवे बेदरदी

    गावइँ कुरसिया के गान॥

    रात तड़पावे जियरवा॥

    रोज-लाल किलवा से कुहकें दुर्गा माई चण्डी के लिहे अवतार॥

    सोनवाँ के खपरा में पियैं भरिखुनवाँ—

    लेइँ जनता के परान॥

    रात तड़पावे जियरवा॥

    फिर से चुनौवा में नेता जी अइहैं—

    अबकी ते ठेंगिया देखाइ।

    जागउ रे मेहनतकस देस के जवनवाँ—

    बदलउ जुलमी विधान॥

    रात तड़तावे जियरवा॥

    सपना सकार भिनसार अब होये बिहंसी जिन्नगिया के भोर।

    तोहरी कुरबनियाँ से धरती जुड़ाई—

    तब होई नवका विहान॥

    रात तड़पावे जियरवा॥

    1984

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 67)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

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