प्रेमिकाएँ धरती की संतप्त आत्माएँ हैं
premikayen dharti ki santapt atmayen hain
पूजा कुमारी
Pooja Kumari
प्रेमिकाएँ धरती की संतप्त आत्माएँ हैं
premikayen dharti ki santapt atmayen hain
Pooja Kumari
पूजा कुमारी
और अधिकपूजा कुमारी
तुमनें धरती जीती
श्रेय अपने पौरुष को दिया
इतराए अपने नाम के शिखर बनाएँ
हारे तो दागदार हुई प्रेमिका की चूनर
उनकी हँसी में आँसुओं का अंश था
आँसुओं में मरी हुई इच्छाएँ
तुम्हारे संग घोर अवसाद में भी खड़ी रहीं
तुम ओढ़नी का कोर भिगाते रहे
वो तुममें साहस भरती रहीं
उन्होंने वर्जनाएँ तोड़ी तुम्हें चुना
चुनी आज़ादी सपनों का आसमां
तन, मन सौप दी चाहत में
छली गईं अनगिनत बार
तुम्हारी जीत का सेहरा कभी उनके माथे नहीं सजा
हार की नाँव में बिठाई गईं हर बार
तुम टूटे तो हिम्मत बनीं
ऊपर उठे तो बेड़ी मानीं गईं
या बना दी गईं दूसरी औरत
प्रेमिकाएँ धरती की संतप्त आत्माएँ हैं
जिनके हिस्से बसंत नहीं पतझड़ आया
आयी दुनिया भर की रूखाई।
- रचनाकार : पूजा कुमारी
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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