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मैं हीर हो जाना चाहती हूँ...

main heer ho jana chahti hoon. . .

ममता धवन

ममता धवन

मैं हीर हो जाना चाहती हूँ...

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    मैं हीर हो जाना चाहती हूँ...

    मैं उस प्रेम को जीना चाहती हूँ

    जहाँ शीघ्र उपलब्धता न हो

    धैर्य हो...

    प्रतीक्षा हो...

    जहाँ घर के पते मायने रखते हों

    ई-मेल न हो

    बहाने बहाने से

    तुम्हारे घर के सामने से गुजरना चाहती हूँ

    ज़िंदगी से वाबस्ता होने के लिए

    मिलना ज़रूरी हो

    फेसबुक न हो

    किसी खेत, नदी किनारे या मंदिर के पास

    तुम्हे मिलना चाहती हूँ

    प्रेम का उन्माद सखा सहेली को कहा जाता हो

    व्हाट्सप्प न हो

    अपनी सहेलियों में तुम्हारी ही बात

    तुम्हारा ही चर्चा चाहती हूँ

    एक-दूसरे का चेहरा देखने की ललक हो

    स्नैपचैट न हो

    कुछ लकीरों में कोरे काग़ज़ पर

    तुम्हारी सूरत बनाना चाहती हूँ

    अचानक मिलने का संयोग भी हो

    डेट ऐप्स न हो

    मैं अचानक किसी पहर

    तुमसे टकरा जाना चाहती हूँ

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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