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पतन

patan

अमित उपमन्यु

और अधिकअमित उपमन्यु

    इसे कहते हैं नरीमन पॉइंट

    यहाँ से शुरू होता है मुंबई के गले का हार

    जो चमचमाएगा रात भर

    और सूरज को सौंप देगा अपनी दो मुट्ठी चकाचौंध भोरकाल

    तीन मुँह वाली अनगिनत चट्टानें

    झेलती रहेंगीं अरब सागर की सारी चोटें सीने पर

    बरकरार रखने अपने हार की चमक।

    इसे रेसकोर्स कहते हैं

    अभी दबेगी बंदूक की लिबलिबी और दौड़ पड़ेंगे घोड़े जीतने के लिए।

    आपने दाँव खेला सात नंबर पर

    नहीं पूछा मगर

    कि जीतेगा कौन?

    मैं? घोड़ा? या घुड़सवार?

    हारेगा कौन?

    मैं? घोड़ा? या घुड़सवार?

    गर पूछते तो गूँजती एक आवाज़ टिकट पर छपे सात नंबर से

    पैसे की जीत

    पैसे की हार

    सात नंबर हार गया

    डूबता हुआ सूरज दो प्राचीन खंभों के बीच बैठा है

    अपनी कमज़ोर रीढ़ और पलकें झुकाए...

    सामने हिलोरें मार रहा है गहरा नीला अलिखित संविधान

    इसके गर्भ में नहीं पलते क्षमादान

    बनना ही पड़ेगा गिलोटीन का ग्रास।

    यह छत्तीसवें माले की छत है!

    यहाँ हज़ारों लोग खड़े हैं आसमान ताकते, हाथ फैलाए

    गोधूलि की लालिमा चमक रही है चेहरों पर

    कुछ उड़ जाएँगे पतंग की तरह...

    यहाँ तक आएगा उनके लिए मुंबई का हार

    कुछ जल जाएँगे पतंगे की तरह

    यहाँ तक आएँगी उनके लिए मुंबई की हार

    यह छत्तीसवें माले की छत है...

    यहाँ हज़ारों लोग खड़े हैं, अकेले।

    ज़िंदगी?

    बस, यहाँ से छत्तीस माले दूर

    मौत?

    यहाँ से बस छत्तीस माले दूर

    देह का गिरना धरा तक

    आत्मा का पतन

    चिरंतन

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमित उपमन्यु
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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