Font by Mehr Nastaliq Web

मेरा दिल तुम्हारे ख़ुफ़िया प्यार की एक घंटी है

mera dil tumhare khufiya pyaar ki ek ghanti hai

अनुवाद : देवेश पथ सारिया

तारिक़ अल-करमी

तारिक़ अल-करमी

मेरा दिल तुम्हारे ख़ुफ़िया प्यार की एक घंटी है

तारिक़ अल-करमी

और अधिकतारिक़ अल-करमी



    तुम यहाँ हो,

    मेरी देह के नीचे,

    एक सोई हुई कँपकँपी

     

    तुमने सूर्योदय को

    अपनी इत्र की शीशी में दुह लिया है

    देखो, ए दिल, मैं तुमसे प्यार करता हूँ

     

    मेरी उँगलियाँ,

    एक बाड़ में प्रवेश करती हैं

    तुम्हें उठा लेने के लिए

     

    तुम्हारी उँगलियाँ डूब जाती हैं

    बर्लिन की नई दीवार में

    मुझ अक्षीय फूल1 को चुनने के लिए

     

    क्या मैंने अपनी

    चमकती उँगलियों के बीच

    पकड़ी बाँसुरी बदल दी?

     

    तुम्हारी उँगलियाँ चोंच हैं

    इन उँगलियों की पकड़ में

    मैं होता हूँ एक पियानो

    और थकता नहीं कभी

     

    हमारी उँगलियों के टकराने से

    हम जन्म लेते हैं

     

    तुम एक घंटी हो

    और मैं भी एक घंटी

    हम एकदम चुपके से

    दस्तक देते हैं

    एक-दूसरे पर।

                     
    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : तारिक़ अल-करमी

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY