मेरा दिल तुम्हारे ख़ुफ़िया प्यार की एक घंटी है
mera dil tumhare khufiya pyaar ki ek ghanti hai
तारिक़ अल-करमी
Tariq al-Karmi
मेरा दिल तुम्हारे ख़ुफ़िया प्यार की एक घंटी है
mera dil tumhare khufiya pyaar ki ek ghanti hai
Tariq al-Karmi
तारिक़ अल-करमी
और अधिकतारिक़ अल-करमी
तुम यहाँ हो,
मेरी देह के नीचे,
एक सोई हुई कँपकँपी
तुमने सूर्योदय को
अपनी इत्र की शीशी में दुह लिया है
देखो, ए दिल, मैं तुमसे प्यार करता हूँ
मेरी उँगलियाँ,
एक बाड़ में प्रवेश करती हैं
तुम्हें उठा लेने के लिए
तुम्हारी उँगलियाँ डूब जाती हैं
बर्लिन की नई दीवार में
मुझ अक्षीय फूल1 को चुनने के लिए
क्या मैंने अपनी
चमकती उँगलियों के बीच
पकड़ी बाँसुरी बदल दी?
तुम्हारी उँगलियाँ चोंच हैं
इन उँगलियों की पकड़ में
मैं होता हूँ एक पियानो
और थकता नहीं कभी
हमारी उँगलियों के टकराने से
हम जन्म लेते हैं
तुम एक घंटी हो
और मैं भी एक घंटी
हम एकदम चुपके से
दस्तक देते हैं
एक-दूसरे पर।
- पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
- संपादक : अविनाश मिश्र
- रचनाकार : तारिक़ अल-करमी
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