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पहाड़पर स्त्री

pahaDpar stri

विकास वत्सनाभ

विकास वत्सनाभ

पहाड़पर स्त्री

विकास वत्सनाभ

और अधिकविकास वत्सनाभ

    दिन भरिक यात्राक ठेहीसँ झमारल

    पहाड़क ओहि पार

    जखन मिझाय लगैत अछि सुरुज

    स्त्रीगणक हेंज घुरय लगैत अछि घर दिस

    पहाड़सँ घर घुरैत स्त्रीक छिट्टामे

    बैसि रहैत अछि सुरुज

    थाकल जाधरि पहुँचैत अछि घर

    सुरुज ओकर छिट्टासँ उतरि

    घरक डिबिया बनि जरय लगैत अछि स्मित

    स्त्रीक घर घुरब

    दरमाहा अयबाक सूचना सन होइत अछि

    घरक सभ जरूरी काज

    जागि जाइत अछि अपन हिस्साक लेल

    माल-मवेसी ताकय लगैत अछि हरियरी

    उपासल चूल्हिमे हठात

    सुनगय लगैत अछि जारनि-काठी

    साँझ-बातीक आबेससँ

    छँटय लगैत अछि आँगनक उदासी

    काजसँ घर घुरैत स्त्री

    बनबैत अछि

    एकैसम सदीक

    सभसँ प्रभावकारी शब्दावली

    पहाड़पर धान रोपैत स्त्रीगण

    कोरसमे गबैत अछि 'असारे गीत'

    माटि-पानिक प्रार्थनासँ

    चतुर्दिक विभोर भ' उठैत अछि पहाड़

    पहाड़पर धान रोपैत स्त्री

    होइत अछि

    पहाड़क इंद्रधनुष

    पहाड़ी स्त्री जखन करैत अछि शृंगार

    सुरुज तोड़ि अनैत अछि गुरांसक ठाढ़िसँ

    खोपामे खोंसि लैत अछि

    एक टा थोका लाली गुरांसक

    खोपामे लाली गुरांसक थोका खोंसने

    लाल रंगक साड़ी पहिरने

    जखन हाथमे थम्हैत अछि हाँसू

    लगैत अछि जेना अकासक नीलिमामे

    दूरस्थ पहाड़पर

    फहरा रहल हो नेपालक राष्ट्रीय ध्वज

    विगुम बाटपर चलैत

    अपन पीठपर बच्चाकें लादि

    ल' जाइत अछि इसकुल

    अभाव गढ़ैत अछि एकर काया

    पहाड़ सींचैत अछि एकर धैरज

    काल्हि यैह बच्चा गोरखा जबान बनि

    पहाड़ जकाँ ठाढ़ होयत मैदानमे

    एहने सन होइत अछि पहाड़ी स्त्रीक दुनिया

    एहिना होइत अछि दुनियाक परिधिक विस्तार

    अपन सबल उपस्थितिसँ

    बदलि रहल अछि कतिपय पुरातन परिभाषा

    पूजैत अछि पहाड़कें

    पहाड़ ओकर पिता छैक पितर सेहो

    आपदा-उल्लासक खिस्सा सुनैत

    पहाड़क किंवदंतीमे जीबैत

    लिखैत अछि स्त्री विमर्शक नवल अध्याय

    किंवदंतीसँ इतर

    स्रोत :
    • पुस्तक : नेपथ्यसँ अबैत हाक (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : विकास वत्सनाभ
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2025

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