Font by Mehr Nastaliq Web

पास आता तूफ़ान

paas aata tufan

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

स्लाव्को मिहालिच

स्लाव्को मिहालिच

पास आता तूफ़ान

स्लाव्को मिहालिच

और अधिकस्लाव्को मिहालिच

    उन बादलों को देखो, मीरा, चुप क्यों हो

    कोई जानवर तो नहीं मैं, लो ये बरसात आई

    सर्दी भी एकदम बढ़ आई

    शहर से हम दूर हैं

    अच्छा, मीरा, कभी भूलूँगा उपहार जो तुमने दिया

    अब तो हम एक हैं फिर बातें भी किसकी करें

    पीले बादल प्राय: ओले लाते हैं

    सभी कुछ तो मौन है झींगुर भी, अनाज भी

    यदि चाहो तो रुक भी सकते हैं हम

    भय केवल तुम्हारा है, मेरी कोई बात नहीं

    खेतों पर चमकने वाली बिजलियाँ घातक होती हैं

    और हम अब सबसे ऊँचे हैं (और यों अभिशप्त एकाकी)

    बहुत-से खेतिहर आज रात को कलपेंगे

    बालियों से बिखर गए दानों को

    मैं परिवर्तनों पर इतना निर्भर रहने को

    तैयार नहीं हो सकता

    रोओ मत, मीरा, ये महज़ मानसिक कसाव है

    और उसे तूफ़ान का अंदेशा है

    मैं फिर कहता हूँ, जीवन हर तरह से बहुत सहज ही है

    ये लो पहली रिमझिम, अभी शुरू हो जाएगी चीख़-पुकार

    बटन लगा लो, देखो, फूल भी बंद हो रहे हैं

    यदि तुम्हें कुछ हो गया तो मैं स्वयं को क्षमा कर सकूँगा

    अवश्य ही मेरी स्मृति में यह स्थल पवित्र रहा आएगा

    जल्दी क़दम बढ़ाओ, भई, पीछे मत मुड़ो

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 137)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : स्लाव्को मिहालिच
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY