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नुचे पंख और ग़ुस्साए लोग

nuche pankh aur ghussaye log

लवली गोस्वामी

लवली गोस्वामी

नुचे पंख और ग़ुस्साए लोग

लवली गोस्वामी

और अधिकलवली गोस्वामी

    उन्होंने चिड़िया का एक-एक पंख नोच लिया

    फिर चिड़िया को उछाला

    चिड़िया नहीं उड़ सकी

    धूल पर गिर गई

    वे ग़ुस्सा हुए

    बोले :

    इस चिड़िया को उड़ना नहीं आता

    फिर उन्होंने चिड़िया से अलग किए हुए

    पंख और डैने अपने हाथों से उछालकर उड़ाए

    पंख ज़मीं पर जा गिरे

    वे फिर उड़ान नहीं देख पाए

    इन पंखों में ज़रा भी उड़ान नहीं है

    वे फिर ग़ुस्से से चिल्लाए

    कवि वही सामने खड़ा

    यह तमाशा देख रहा था

    वह नहीं कह सका

    मेरी एक-एक पंक्ति को तोड़कर

    उसका अलग अर्थ निकालकर

    आप मेरे व्यक्तित्व को नहीं समझ सकते

    चिड़िया भी नहीं कह सकी

    पक्षी के एक-एक पंख को उखाड़कर

    उसके डैने नोचकर

    आप कभी उसकी उड़ान की उँचाई

    नहीं समझ सकते।

    स्रोत :
    • रचनाकार : लवली गोस्वामी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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