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गामक मधुमास

gamak madhumas

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

गामक मधुमास

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

और अधिककाञ्चीनाथ झा 'किरण'

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    जाड़ फटलइ! उषम धबलइ!

    माछी करय गम गम

    मधुमाछी गुन गुन

    टप टप पट पट पात झड़इ

    जनि, गाछ-विरिछकेर आङ सिहरइ।

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    धरतीक धीया

    भोरे लऽ पथिया

    गाछक अङना साफ करइ।

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    खड़राक खर खर

    पातक मर मर

    कङनाक झन झन

    चूड़ीक झम झम

    एकाकार भऽ

    पवनक कनमे

    धरारागिनी गान भरइ।

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    पातक कुरिया

    हँसोथि भरइ पथिया

    कुदि कुदि कसइ

    ठेहुनसँ दाबि दाबि

    चारू दिसि हेरि हेरि

    अनेरे हँसइ

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    क्यो हँसैत चलइ

    क्यो हकमैत चलइ

    चमकि दौड़ि क्यो आगू बढ़इ

    लट पट करइत बूढ़ि पुरनियाँ

    नबकिक गतिपर बाहुर किचइ

    मधुमास एलइ! मधुमास एलइ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : कतेक दिनक बाद (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 31)
    • संपादक : डॉ कैलासनाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास
    • रचनाकार : काञ्चीनाथ झा 'किरण'
    • प्रकाशन : किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान (धर्मपुर, लोहना रोड, दरभंगा)
    • संस्करण : 1989

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